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jane metabolic syndrome mental health ko prabhavit kar sakte hain. मेटाबोलिक सिंड्रोम होने पर मानसिक विकार हो सकते हैं।


मेटाबोलिज्म एक्टिविटी स्लो होने का प्रभाव मेन्टल स्टेटस पर पड़ता है। जर्नल ऑफ़ अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन की स्टडी बताती है कि मेटाबोलिक सिंड्रोम होने पर तनाव, अवसाद और मेंटल हेल्थ से जुड़े अन्य मानसिक विकार हो सकते हैं।

फिजिकल हेल्थ और मेंटल हेल्थ एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि हमारे पाचन तंत्र, सर्कुलेटरी सिस्टम में कुछ गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा असर हमारे मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। ठीक इसी तरह हमारी मेटाबोलिक एक्टिविटी का प्रभाव हमारी साइकोलॉजी पर पड़ता है। हालिया शोध बताते हैं कि मेटाबोलिक प्रोफ़ाइल सीधे तौर पर साइकिएट्रिक डिसऑर्डर  से जुड़े हैं। मेटाबोलिक सिंड्रोम स्थितियों का एक समूह है, जो एक साथ घटित होता है। क्या है शोध (metabolic syndrome and mental disorder)?

क्या कहता है शोध (research on metabolic syndrome and mental disorder connection)

जर्नल ऑफ़ अमेरिकन मेडिकल असोसिएशन (JAMA) के अनुसार, 2 लाख से अधिक व्यक्तियों पर मेटाबोलिक प्रोफ़ाइल की स्टडी की गई। जनसंख्या-आधारित इस समूह अध्ययन के निष्कर्ष में मेटाबोलिक प्रक्रिया को अवसाद और तनाव से जुड़ा हुआ पाया गया। इसमें ग्लूकोज और ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल और हाई डेंसिटी वाले लिपोप्रोटीन के लो लेवल पाए गए।  ये सभी  भविष्य में डिप्रेशन, एंग्जायटी और तनाव से संबंधित डिसऑर्डर के हाई रिस्क से जुड़े हुए पाए गए। इन निष्कर्षों से पता चलता है कि कार्बोहाइड्रेट और लिपिड मेटाबोलिज्म सामान्य मेंटल डिसऑर्डर के विकास में शामिल हो सकते हैं।

ग्लूकोज और ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल बढ़ाता है मनोरोग (high level of glucose and triglycerides increase mental disorder)

शोधकर्ताओं ने पाया कि 21 वर्षों के फॉलो अप के दौरान 16,256 व्यक्तियों में अवसाद, एंग्जायटी या स्ट्रेस से संबंधित डिसऑर्डर का निदान किया गया। ग्लूकोज और ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल सभी मनोरोग विकारों के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है। मुख्य रूप से स्वीडन के स्टॉकहोम क्षेत्र में फैले स्वीडिश एपोलिपोप्रोटीन-संबंधित डेथ रिस्क समूह (।में 1985 से 1996 तक स्टडी की गई थी। इसमें 49% पुरुष, और 51% महिलाएं शामिल थीं, जो नियमित हेल्थ चेकअप से गुजरी थीं। पार्टिसिपेंट की औसत आयु 42 थी।

कैसे मेटाबोलिज्म मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है (metabolism affect mental health)?

शोध से पता चलता है कि इंसुलिन रेसिस्टेंस जैसे मेटाबोलिक डिसऑर्डर विकसित होने से अवसाद का खतरा दोगुना हो सकता है। भले ही व्यक्ति के पास मेंटल डिजीज का कोई पूर्व इतिहास न रहा हो। सबूत बताते हैं कि मेटाबोलिक डिसऑर्डर के कारण सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और डिप्रेशन जैसे प्रमुख मानसिक विकार हो सकते हैं।

kya hai metabolism
इंसुलिन रेसिस्टेंस जैसे मेटाबोलिक डिसऑर्डर विकसित होने से अवसाद का खतरा दोगुना हो सकता है।  चित्र : शटरस्टॉक

मेंटल डिसऑर्डर के कारण मेटाबोलिक सिंड्रोम (metabolic syndrome and mental disorder)

मेंटल डिसऑर्डर से पीड़ितों में वजन बढ़ना, मोटापा, हाइपरलिपिडिमिया, हाइपरग्लाइकेमिया और इंसुलिन रेसिस्टेंस सहित मेटाबोलिक सिंड्रोम विकसित होने का खतरा अधिक होता है। गंभीर मानसिक बीमारी, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और एंटीसाइकोटिक दवाओं का उपयोग। ये सभी मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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मेटाबोलिक सिंड्रोम और डिप्रेशन में है कनेक्शन (metabolic syndrome and depression connection)

अक्सर मेटाबोलिक सिंड्रोम और अवसाद दोनों की जड़ में एकसमान चीजें मौजूद हो सकती हैं। इनमें तनाव, सूजन और हार्मोन असंतुलन भी शामिल हैं। मेटाबोलिक सिंड्रोम और अवसाद के बीच का संबंध दोनों तरह से हो सकता है। मेटाबोलिक सिंड्रोम स्थितियों का एक समूह है, जो एक साथ घटित होता है। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके कारण ब्लडप्रेशर में वृद्धि, हाई ब्लड शुगर, कमर के आसपास शरीर की एक्स्ट्रा फैट और असामान्य कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड लेवल शामिल हैं।

depression se jang aapko behtar aur mazboot banati hai
मेटाबोलिक सिंड्रोम और अवसाद दोनों की जड़ में एकसमान चीजें मौजूद हो सकती हैं। चित्र:शटरस्टॉक

ब्रेन की मेटाबोलिक एक्टिविटी बाधित (disrupted Brain metabolic activity)

डिप्रेशन के लक्षण इस बात का संकेत दे सकते हैं कि हमारे ब्रेन की मेटाबोलिक एक्टिविटी बाधित हो गई हैं। थकान फील करना, लो एनर्जी फील करना, भूख में बदलाव, गतिविधियों में रुचि की कमी सिर्फ अवसाद के मनोवैज्ञानिक मार्कर नहीं हैं। वे इंटरनल मेटाबोलिज्म चेंज के संकेत भी दे सकते हैं। बढ़ी हुई लैक्टेट, ग्लूटामेट, सैकरोपिन और सिस्टीन हॉर्मोन घट जाते हैं। ये रिडक्टिव स्ट्रेस होने का प्रमाण देते हैं। शोध में पाई गई 75 प्रतिशत मेटाबोलिज्म संबंधी असामान्यताएं व्यक्तिगत थीं। यानी व्यक्ति के खुद के मेंटल स्टेटस से प्रभावित था। फ्लेविन एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड, सिट्रुललाइन, ल्यूटिन, कार्निटाइन या फोलेट में व्यक्तिगत रूप से कमी पाई गईं।

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jane kyon jaroori hai bird flu se stark rehna. जानें क्यों जरूरी है बर्ड फ्लू से सतर्क रहना।


एवियन फ़्लू या बर्ड फ़्लू के कारण हर साल लाखों की संख्या में पक्षी मारे जाते हैं। इस साल भी अमेरिका में डेयरी काऊ के इसके वायरस H5N1 से प्रभावित होने के कारण वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन इस बीमारी से सतर्क रहने के लिए बार-बार कह रहा है। जानते हैं भारत में बर्ड फ्लू की क्या स्थिति है।

पिछले दिनों अमेरिका में डेयरी गायों के बीच बर्ड फ्लू के वायरस H5N1 फैलने की खबर हर तरफ थी। फिर गायों के साथ रहने वाला एक आदमी भी इस वायरस के साथ पॉजिटिव पाया गया। इससे एक बार फिर एवियन फ़्लू के कोरोनोवायरस पेंडेमिक की तरह होने की आशंका जताई जाने लगी। भारत में भी एवियन फ़्लू से पक्षियों और मनुष्यों के प्रभावित होने के मामले देखे गए हैं। इनमें से ज्यादातर मामले पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देखे गए। यह वायरस पोल्ट्री से मानव संक्रमण का कारण बहुत कम बनता है। मानव-से-मानव संक्रमण अबतक नहीं देखा गया है। जानते हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बारे में क्या (bird flu) कहता है?

क्या कहता है वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन (World Health Organization about H5N1 Virus)

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 24 मार्च 2024 को वियतनाम में एक व्यक्ति के बर्ड फ़्लू से प्रभावित होने का मामला सामने आया। 2021 में भारत ने हरियाणा से एवियन इन्फ्लूएंजा (एच5एन1) के एक मानव मामले के बारे में सूचित किया था।

अमेरिका में बर्ड फ्लू (Bird flu in America) 

यह देश में इस तरह का पहला मामला सामने आया था। ऐसा पहली बार हुआ है कि अमेरिका में डेयरी गायों में बर्ड फ्लू पाया गया है। यह वायरस पहली बार गायों में और फिर गायों से मनुष्यों में रिपोर्ट किया गया है। इन्फ्लूएंजा वायरस के कई मेजबान होते हैं। यह कहना मुश्किल है कि गाय एक नई होस्ट है या हमेशा इसकी होस्ट रही है।

वायरस की सक्रियता बहुत अधिक (very active H5N1 Virus)

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारियों के अनुसार, एच5एन1 वायरस (H5N1 Virus) बहुत तेजी से दुबारा सक्रिय हो जाता है। यह खुद को अन्य वायरस के साथ जोड़ लेता है और अपना आरएनए (Ribonucleic acid) छोड़ देता है। इसलिए इस वायरस के क्रिया कलापों पर लगातार निगरानी रखना जरूरी है। हालांकि महामारी फैलने की संभावना बहुत कम है।

इस मामले में संबंधित मेडिकल स्टाफ को आइसोलेट कर दिया गया है। चित्र: शटरस्टॉक
एच5एन1 वायरस (H5N1 Virus) बहुत तेजी से दुबारा सक्रिय हो जाता है। चित्र: शटरस्टॉक

एनिमल इन्फ्लुएंजा (Animal influenza)

एनिमल इन्फ्लूएंजा वायरस आम तौर पर जानवरों में फैलता है, लेकिन मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकता है। मनुष्यों में संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों या दूषित वातावरण के सीधे संपर्क के माध्यम से होता है। मूल मेजबान के आधार पर इन्फ्लूएंजा ए वायरस को एवियन इन्फ्लूएंजा, स्वाइन इन्फ्लूएंजा, या अन्य प्रकार के एनिमल इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

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क्यों पेंडेमिक का डर सता रहा है (bird influenza may be pandemic)

H5N1, इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है और उनमें गंभीर श्वसन बीमारी का कारण बनता है। यह छिटपुट रूप से मनुष्यों तक पहुंच गया है। मनुष्यों में एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस संक्रमण हल्के ऊपरी रेस्पिरेटरी पाथवेज के संक्रमण से लेकर अधिक गंभीर बीमारियों तक का कारण बन सकता है और घातक भी हो सकता है।

कोविड से अधिक जानलेवा 

कंजंक्टिविटिस, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिम्प्टम, एन्सेफलाइटिस और एन्सेफैलोपैथी की भी सूचना मिली है। मनुष्यों के बीच संचरण आम बात नहीं है, लेकिन जब ऐसा होता है, तो मृत्यु दर 50 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। कोविड के गंभीर वेरिएंट के साथ भी मृत्यु दर लगभग 3 प्रतिशत थी। यही वजह है कि इस वायरस के संक्रमण को कोविड से अधिक जानलेवा माना जा रहा है। इस वायरस को रोकना असंभव है क्योंकि यह पिछले 28 वर्षों से मौजूद है।

बर्ड फ्लू से बचने के लिए जरूरी है कुछ बातों का ध्‍यान रखना। चित्र: शटरस्‍टॉक्‍
अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र के उपयोग के साथ गुड हैंड हाइजीन बनाए रखना भी जरूरी है। चित्र: शटरस्‍टॉक्‍

बचाव के क्या हो सकते हैं उपाय (Prevention tips for bird flu infection)

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, लोगों को हाई रिस्क वाले वातावरण जैसे जीवित पशु बाजारों/फार्मों और जीवित पोल्ट्री या उन सतहों के संपर्क से बचना चाहिए जो पोल्ट्री ड्रॉपिंग से दूषित हो सकती हैं। बार-बार हाथ धोने या अल्कोहल-आधारित हैंड सैनिटाइज़र के उपयोग के साथ गुड हैंड हाइजीन बनाए रखना भी जरूरी है। जोखिम वाले व्यक्तियों के बीमार पड़ने या अप्रत्याशित एनिमल और बर्ड डेथ (bird flu) की घटनाओं की तुरंत अस्पतालों में रिपोर्ट करनी चाहिए। बीमार या अप्रत्याशित रूप से मरे हुए पोल्ट्री के सेवन से बचना चाहिए।

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There Will Be Tight Security For Ram Navami Procession In Hyderabad, Administration Alert – हैदराबाद में रामनवमी जुलूस के लिए रहेगी कड़ी सुरक्षा, प्रशासन सतर्क


हैदराबाद में रामनवमी जुलूस के लिए रहेगी कड़ी सुरक्षा, प्रशासन सतर्क

हैदराबाद:

हैदराबाद में 17 अप्रैल को रामनवमी जुलूस को देखते हुए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी. पुलिस आयुक्त कोथाकोटा श्रीनिवास रेड्डी ने जुलूसों की व्यवस्था की समीक्षा के लिए शुक्रवार को संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने मुख्य जुलूस के मार्ग का निरीक्षण करने के अलावा आयोजकों और अन्य विभागों के साथ समन्वय बैठक भी की.

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रमजान और ईद-उल-फितर के सफल और शांतिपूर्ण समापन के लिए बल को बधाई देते हुए, रेड्डी ने राम नवमी और संबंधित जुलूसों के लिए की जाने वाली व्यवस्थाओं की गंभीरता पर जोर दिया.

सीतारामबाग मंदिर से हनुमान व्यायामशाला तक मुख्य जुलूस के अलावा शहर में कई जुलूस निकाले जाएंगे, जिनकी निगरानी की जरूरत है. इसके अलावा, कुछ अंतर-कमिश्नरी जुलूस भी होंगे.

कमिश्नर ने डीसीपी, एसीपी और एसएचओ को अलर्ट पर रहने और शांति समितियों के साथ बैठकें करने के अलावा पहले से ही तैयारी करने को कहा. उन्हें सभी सीसीटीवी कैमरे चालू रखने और सोशल मीडिया, आदतन अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है.

रेड्डी ने जुलूसों के शुरू होने के समय और डीजे सिस्टम के इस्तेमाल से बचने के संबंध में भी निर्देश दिये. आयोजकों से कहा गया है कि पटाखे फोड़ना, राहगीरों पर सिन्दूर या गुलाल फेंकना और लाठी/तलवार/पिस्तौल आदि ले जाना सख्त मना है.

रेड्डी ने कहा, “हैदराबाद को एक बहुसांस्कृतिक शहर होने पर गर्व है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी को भी किसी भी समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह दिखाने की गुंजाइश दिए बिना यहां शांति बनी रहे.”

 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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Noida Road Accident 3 People Of Same Family Killed One Injured In Road Accident – नोएडा: सड़क हादसे में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, एक घायल


नोएडा: सड़क हादसे में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, एक घायल

हादसे के बाद सड़क पर बिखरे शव का मंजर दिल दहलाने वाला था…

नोएडा :

उत्‍तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मोटरसाइकिल को पीछे से तेज रफ्तार से आये अज्ञात वाहन ने टक्कर मारकर भाग जाने से हुए सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवती गंभीर रूप से घायल हो गई. ये हादसा ग्रेटर नोएडा के बीटा 2 थाना क्षेत्र में शुक्रवार को तड़के ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर हुआ. पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है. 

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हादसे के बाद सड़क पर बिखरे शव का मंजर दिल दहलाने वाला था. कुलेसरा के रहने वाले सुरेंद्र अपनी बहनों के साथ में मोटरसाइकिल से कासना से कुलेसरा जा रहे थे. वह चार लोग मोटरसाइकिल पर सवार थे. रात करीब 2 बजे जब वह लोग परीचौक पर पहुंचे, तो ब्रेकर पर उनकी मोटरसाइकिल अनियंत्रित हो गई. इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार से आये अज्ञात वाहन ने बाइक सवारों को रौंद दिया. हादसे में बाइक चला रहे सुरेंद्र, शैली, अंशु और बहन की सहेली घायल हो गई. सभी को अस्पताल ले जाया गया. जहां पर डॉक्टरों ने तीन को मृत घोषित कर दिया. जब एक युवती अस्पताल में भर्ती है और उसका उपचार चल रहा है.

थाना बीटा 2 प्रभारी ने बताया कि यह लोग एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए कसाना गए थे और रात में करीब 2 बजे कासना से कुलेसरा के लिए जा रहे थे, लेकिन तभी रात्रि में एक अज्ञात वाहन ने बाइक में टक्कर मार दी. इस हादसे में तीन की मौत हो गई. इस घटना के बारे में उनके परिजनों को जानकारी दे दी गई है. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अज्ञात वाहन की पहचान की जा रही है और पुलिस का कहना है कि इस मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

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How To Control High Uric Acid Mix Anjeer With Milk To Get Rid Off Uric Acid Uric Acid Ko Kaise Khatam Kare 7 Din Me Uric Acid Hoga Control


रात को दूध में भिगोकर रख दें ये चीज सुबह खाली पेट खाएं, कुछ ही दिनों में कम होने लगेगा High Uric Acid, जादुई है ये नुस्खा

Anjeer Milk for Uric Acid: अंजीर यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद करती है.

How to Control Uric Acid: आज के समय में लोगों की खराब लाइफस्टाइल और खानपान की वजह से लोग कई तरह की गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. जिनमें से एक है हाई यूरिक एसिड जिसकी वजह से जोड़ों में दर्द की शिकायत और सूजन हो जाती है. बता दें कि यूरिक एसिड हमारे शरीर में पड़ने वाला एक ऐसा पदार्थ है जो प्यूरिन के टूटने पर बनता है. वैसे तो ये किडनी के रास्ते यूरिव की मदद से शरीर से बाहर निकल जाता है. लेकिन जब ये शरीर में ज्यादा मात्रा में बढ़ जाता है तो किडनी इसे पूरी तरह से बाहर नहीं निकाल पाती है. धीरे-धीरे इसके छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में जमने लगता है. ऐसे में जोड़ों में दर्द और सूजन जैसी कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने पर अपने खानपान का खास ख्याल रखना होता है. आप कुछ घरेलू उपायों की मदद से यूरिक एसिड लेवल को कम किया जा सकता है. आइए जानते हैं यूरिक एसिड को घरेलू तरीकों से ठीक करने के लिए क्या करना चाहिए.

शरीर में बढ़े हुए यूरिक एसिड को कम करने में अंजीर करता है मदद ( Anjeer to Control High Uric Acid)

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हाई यूरिक एसिड की समस्या को दूर करने में अंजीर बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. ये शरीर में जमा प्यूरिन को बाहर निकालने में मदद कर सकता है. इसमें पाए जाने वाले विटामिन्स, फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सिडेंट्स जैसे पोषक तत्व यूरिक एसिड को कम करने में मदद कर सकते हैं. साथ ही, यह प्रोटीन मेटाबॉलिज्म में भी मदद करता है, जिससे हाई यूरिक एसिड की परेशानी कम हो सकती है.

हाई यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए कैसे करें अंजीर का सेवन ( How to Eat Anjeer for Control High Uric Acid)

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए आप दूध के साथ अंजीर का सेवन कर सकते हैं. इसके लिए रात को एक गिलास दूध में 2-3 अंजीर को भिगोकर रातभर के लिए रख दें. सुबह खाली पेट इस दूध का सेवन करें. इतना ही नहीं, इसके सेवन से कब्ज समेत कई अन्य समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)



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Ankho Se Chasma Kaise Hataye | Ankho Ki Roshni Badhane Ke Gharelu Upay | How To Get Sharp Eyes | Food For Sharp Eye Vision | Almonds And Fennel Seeds For Good Eyesight


चश्मा उतारने और आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए रोजाना खाएं ये दो चीजें, कुछ ही समय में दिखेगा असर, कमजोर नजर होगी दुरुस्त

हर दिन इन दो चीजों का सेवन करने से बढ़ेगी आंखों की रोशनी.

How to increase eyesight: आंखें हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी बदौलत हम इस दुनिया की खूबसूरती को निहार पाते हैं. बदलते समय ने हम सभी को आधुनिक उपकरण और आधुनिक तकनीक के इतने निकट लाकर खड़ा कर दिया है कि इसका सीधा असर हमारी आंखों पर देखने को मिलता है. अत्यधिक मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर के इस्तेमाल से कम उम्र में ही हमारी आंखों की रोशनी कमजोर होने लगी है जिसके लिए आयुर्वेद में कई उपाय  (Eyesight Ko Badhane Ke Upay) बताए गए हैं. आंखों की रोशनी बढ़ाने (ankho ki roshni badhae ke upay) के लिए नियमित रूप से बादाम और सौंफ का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

आंखों का चश्मा हटाने के उपाय, जानें क्या खाएं | आंखों के लिए बादाम और सौंफ के फायदे (Ankho Ki Roshni Badhane Ke Gharelu Upay | Benefits of Almonds and Fennel for Eye)

1. आंखों के लिए फायदेमंद

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आयुर्वेद में बादाम और सौंफ का सेवन बेहद उपयोगी माना गया है. अगर आप नियमित रूप से बादाम और सौंफ को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो इससे आपकी आंखों की कमजोरी दूर होती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है. बादाम और सौंफ के सेवन से रतौंधी की समस्या भी नहीं होती.

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2. बहुत गुणकारी हैं बादाम और सौंफ

आयुर्वेद की भाषा में सौंफ को ‘नेत्र ज्योति’ कहा जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं जो आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. सौंफ का सेवन आपकी आई हेल्थ को बेहतर बनाता है. वहीं बादाम में मौजूद विटामिन ए और ओमेगा-3 फैटी एसिड आपकी आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है. यह आपके रेटिना को स्वस्थ रखता है और आंखों में मौजूद कोशिकाओं की झिल्ली की संरचना को सुधारने और मरम्मत करने में सहायक होता है.

3. कई पोषक तत्व आंखों के लिए हैं फायदेमंद

बादाम में मौजूद विटामिन ए, विटामिन ई और ओमेगा फैटी एसिड आंखों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करता है. यहां तक कि आंखों में आई सूजन से भी छुटकारा दिलाता है. वहीं सौंफ में मौजूद विटामिन सी, पोटैशियम, एंथोसायनिन और ल्यूटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट आंखों को कई तरह के संक्रमण और क्षति से बचाते हैं.

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4. कैसे करें बादाम और सौंफ का सेवन

आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने के लिए आप सोने से पहले रात के समय 4 से 5 बादाम और एक चम्मच सौंफ पानी में भिगोकर रख दें. सुबह इन दोनों को पीसकर दूध में मिलाकर इसका सेवन करें.

5. भूनकर भी खा सकते हैं

अगर आप सौंफ और बादाम को पानी में भिगोकर नहीं खाना चाहते तो आप इन दोनों को भूनकर भी खा सकते हैं. इसके अलावा आप बादाम और सौंफ को स्मूदी में मिक्स करके भी इसका सेवन कर सकते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)



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Ankho Ki Roshni Badhane Ke Liye Kya Kre How To Remove Specs Naturally How To Get Sharp Eyesight Badhane Ke Gharelu Upay Eyesight Increasing Remedies Chasma Kaise Hataye


कमजोर आंखों पर चश्मा पहनते हैं आप, तो रोज कर लीजिए ये काम, आखों की रोशनी हो जाएगी तेज

Chasma Hatane Ka Tareeka: इन चीजों को रेगुलर करने से आंखों की रोशनी बढ़ सकती है.

Ankho Ki Roshni Tej Karne Ke Gharelu Upay: ऐसी कोई भी जादुई चीज नहीं है, जिससे एकदम से आंखों की रोशनी को बढ़ाया जा सके. आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय काफी हद तक मदद करते हैं, लेकिन रेगुलर इनको करना जरूरी है. अगर आप महीनेभर तक घर पर ही कुछ चीजों को फॉलो करते हैं, तो कमजोर हो रही आंखों को तेज किया जा सकता है. इसके साथ ही जो लोग चश्मा लगाते हैं वे भी आंखों की रोशनी को बढ़ाने और आंखों से चश्मा हटाने के उपाय के तौर पर इन नुस्खों को फॉलो करें. वैसे भी आज के दौर में हमारी लाइफस्टाइल में लंबे समय तक कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों का उपयोग होता है, जिसके कारण आंखों पर दबाव पड़ता है. आजकल बहुत से लोगों की नजर कमजोर हो रही है. न सिर्फ बड़ी उम्र में बल्कि छोटी के बच्चे भी कमजोर आंखों से जूझ रहे हैं. यहां हम कुछ प्राकृतिक उपायों के बारे में बता रहे हैं, जिनको फॉलो कर आप आंखों की रोशनी को बढ़ावा दे सकते हैं.

चश्मा हटाने और आंखों की रोशनी बढ़ाने के कारगर घरेलू उपाय | Effective Home Remedies To Remove Glasses And Improve Eyesight

1. पलकों की व्यायाम

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रेगुलर पलकों की व्यायाम करना आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इससे आंखों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और आंखों में सुधार होता है. 

2. डाइट

ऐसी चीजों का सेवन करें जो आंखों के लिए फायदेमंद होते हैं, जैसे की गाजर, पालक, अखरोट, बादाम, आम और गोभी. ये सभी फूड्स आंखों के लिए विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सिडेंट्स प्रदान करते हैं जो उन्हें हेल्दी रखने में मदद करते हैं.

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3. रेगुलर आई इरिटेंट एक्सरसाइज

आंखों की रोशनी को बढ़ावा देने के लिए व्यायाम बहुत जरूरी होता है. इसमें आपको अपनी आंखों को कुछ सेकंड के लिए बंद करके खोलना होता है, फिर उन्हें बंद करना होता है. इस प्रक्रिया को दिन में कई बार दोहराएं.

4. रेगुलर आंखों का टेस्ट

अपनी आंखों की सेहत के लिए रेगुलर आंखों का चेकअप करवाना बहुत जरूरी है. रेगुलर चेकअप आपको आंखों की कई बड़ी समस्याओं से बचने और उनका जल्दी इलाज शुरू करने में मदद करता है.

5. आंखों को धोने का तरीका

आंखों को साफ करने के लिए सही तरीका अपनाएं. कभी भी आंखों को अपनी अंगुली से ना पोंछें. बल्कि, साफ पानी या फिर आंखों के लिए खासतौर से बनाया गया आंखों के लिए क्लीनजर का उपयोग करें.

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इन प्राकृतिक उपायों को अपनाकर आप अपनी आंखों की सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं और उसे बढ़ा सकते हैं. याद रहे आंखों का समय पर ध्यान रखना आपकी लाइफ क्वालिटी को इंप्रूव करेगा.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)



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5 Effective Yogasan For Hair Growth And Regrow | How To Regrow New Hair In One Week | Ganje Sir Par Baal Kaise Unagye | Naye Baal Kaise Ugaye | Baal Jhadne Se Roke


रोजाना 15 मिनट करें ये 5 योगासन, गंजे सिर पर भी लहराएंगे काले घने बाल, भूल जाएंगे गिरते बालों वाले बुरे दिन, कुछ ही समय में दिखेगा फर्क

5 Yogasana For Hair Regrow : बाल झड़ने की समस्याएं एक ऐसी समस्या है जो न सिर्फ उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है, बल्कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी से भी इस परेशानी को झेलना पड़ता है. मार्केट में कई सारे प्रोडक्ट्स ऐसे हैं जो दावा करते हैं कि आपके बाल झड़ना रुक जाएंगे, लेकिन ये तो इस्तेमाल करने वाला ही जानता है कि उसके परिणाम क्या हैं. योग एक ऐसा विज्ञान है जिसमें कई बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज संभव है. इसी कड़ी में बाल झड़ने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए पांच योगासन ऐसे हैं जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में शामिल करके झड़ते बालों को तो रोक ही देंगे साथ ही ये योगासन आपके बालों को री ग्रो करने में भी मदद करेंगे.

झड़ते बालों के लिए 5 योगासन (5 Yogasan For Hair Fall)

1. उत्तानासन (कैमल मुद्रा)

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उत्तानासन करने से आपके सिर तक ऑक्सीजन के स्तर और ब्लड सर्कुलेशन की स्थिति बेहतर होती है. शुरू में ये आसन बहुत कठिन हो सकता है, लेकिन धीरे धीरे इसे आप आसानी से कर पाएंगे. इससे आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़िया होता है और हीमोग्लोबिन बढ़ता है. ये योगासन आपके बालों को ग्रो करने और झड़ते बालों को रोकने में मदद करता है.

2. शीर्षासन (हैडस्टेंड पोजीशन)

आपके सिर तक ऑक्सीजन का सर्कुलेशन बेहतर करने में शीर्षासन या हैडस्टेंड पोजीशन बहुत मददगार हो सकता है. इस योगासन से बालों के पतले होने और झड़ने की समस्या खत्म हो सकती है. इसके अलावा आप सफेद होते बालों के लिए भी इस योगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं.इस योगासन से निष्क्रिय हो चुके हेयर फॉलिकल की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.

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3. मत्स्यासन (फिश पोज)

​बालों से जुड़ी समस्या से छुटकारा पाने के लिए मत्स्यासन करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है. अगर आप चाहते हैं कि आप के बाल जल्दी-जल्दी ग्रो करें तो आपको फिश पोज करना चाहिए. ये आसन आप घर पर ही बड़ी आसानी से कर सकते हैं. मत्स्यासन करने से आपके सिर तक ऑक्सीजन सही मात्रा में पहुंचती है, जो हेयर फॉल को रोकता है.

4. वज्रासन

​अगर आप बोलों की समस्या से पीड़ित हैं तो बेहद सरल इस आसन को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें. वज्रासन आपके बालों की ग्रोथ और पतले झड़ते बालों की समस्या से छुटकारा दिला सकता है. साथ ही इससे आपके बाल मोटे भी होते हैं. इस योगासन से आपको पेट से जुड़ी बीमारियों से भी राहत मिल सकती है.

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5. बालासन

अगर आप बालों, तनाव और पेट से जुड़ी समस्या झेल रहे हैं तो यह आसन आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि बालों का झड़ना पेट और तनाव से जुड़ी समस्या के कारण होती है. साथ ही अगर आप एंग्जाइटी से परेशान हैं तो भी ये आसन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)



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